इस्लाम के 6 नंबर क्या हैं? 786 का मतलब और 6 कलमा पूरी जानकारी
इस्लाम में 6 नंबर क्या हैं? 786 का मतलब क्या है और कलमा 1 से 6 तक पूरी जानकारी
आज के समय में बहुत से लोग इंटरनेट पर इस्लाम से जुड़े सवाल सर्च करते हैं, जैसे—इस्लाम के 6 नंबर क्या हैं, 786 क्यों लिखा जाता है और कलमा 1 से 6 क्या होते हैं। इस लेख में हम इन सभी सवालों का सही और स्पष्ट जवाब समझेंगे।
इस्लाम के 6 नंबर कौन से हैं?
इस्लाम में 6 नंबर का अर्थ है ईमान के 6 बुनियादी स्तंभ (Articles of Faith)।
- अल्लाह पर ईमान
- फरिश्तों पर ईमान
- आसमानी किताबों पर ईमान
- पैगम्बरों पर ईमान
- क़यामत के दिन पर ईमान
- तक़दीर पर ईमान
786 का मतलब क्या है?
786 को कुछ लोग "बिस्मिल्लाह" से जोड़ते हैं। यह अरबी अक्षरों की गिनती (Abjad system) के अनुसार निकाला गया एक संख्या रूप है।
कलमा 1 से 6 क्या होते हैं?
कलमा इस्लाम की बुनियादी गवाही और दुआ से जुड़े वाक्य होते हैं।
- पहला कलमा: ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह
- दूसरा कलमा: शाहादत
- तीसरा कलमा: तमीज
- चौथा कलमा: तौहीद
- पांचवां कलमा: इस्तिग़फार
- छठा कलमा: रद्दे कुफ्र
इस्लाम की असली बुनियाद
इस्लाम दो मुख्य हिस्सों पर आधारित है:
- ईमान (6 अरकान)
- इस्लाम (5 अरकान)
लोग कन्फ्यूज क्यों होते हैं?
अधूरी जानकारी और गलत स्रोतों के कारण लोग 786 और 6 कलमा को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। इसलिए सही जानकारी लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
✍️ Author: Mr Robdeen

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